नेहा सिंह राठौड़ को अपनी उर्दू सुधारनी चाहिए न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू  

 मुझे बड़ा खटकता है जब कोई उर्दू लव्ज़ का सही तलफ़्फ़ुज़ ( उच्चारण ) न हो I नेहा सिंह राठौड़ को मैं बहादुर महिला मानता हूँ, जो जनता के वास्तविक मुद्दे जैसे ग़ुरबत, बेरोज़गारी, महंगाई आदि को बहादुरी से अपने गीतों में उजागर करती हैं I

For advertisement on our platform, do call at +91 6377460764 or email us at [email protected].

पर नेहा और आजके अधिकतर हिंदुस्तानी सही तलफ़्फ़ुज़ का इस्तेमाल न करके उर्दू जैसी महान भाषा की कमर तोड़ देते हैं I 

यह वीडियो देखिये इसमें नेहा मज़े को मजे, ख़बर को खबर, ख़तरा को खतरा, ज़रूरत को जरुरत, ज़रा को जरा, यक़ीन को यकीन, ख़त्म को खत्म, ग़ज़ब को गजब, ग़ायब को गायब, आवाज़ को आवाज, बेरोज़गारी को बेरोजगारी, ख़ुद को खुद, ज़्यादा को जादा, रोज़गार को रोजगार, ज़िम्मेदारी को जिम्मेदारी कहती हैं 

इस छोटी सी तक़रीर में नेहा ने १५ ग़लतियाँ की I

मैं यह सब नेहा को नीचे गिराने के लिए नहीं कह रहा हूँ, बल्कि नेहा को बुलंदी पर पहुंचाने के लिए I 

मैं निहा का बड़ा प्रशंसक हूँ, पर सही प्रशंसक आलोचक भी होता है 

Author