क्या लोकतंत्र में जनता को सरकार की आलोचना करने का अधिकार है ? लेखक- जस्टिस काटजू
ऐसे बहुत सारे उदाहरण दिए जा सकते हैं जब बदले की भावना से भरे नेताओं के इशारों पर गैर-कानूनी और अनुचित गिरफ्तारियां हुईं. सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट्स को भीष्म पितामह की तरह द्रौपदी के चीरहरण पर आंखें मूंद लेने की तरह, साफ नजर आ रहीं इन गैर-कानूनी गतिविधियों को नजरअंदाज कर देना चाहिए ?